भारत की संस्कृति और परंपरा में पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रहा है। ये लोग पीढ़ियों से अपने पारंपरिक कौशल के जरिए न केवल अपनी जीविका चला रहे हैं, बल्कि देश की सांस्कृतिक विरासत को भी संजोए हुए हैं। इन्हीं कारीगरों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने और उनके कार्य को सरकारी समर्थन देने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा “प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना” (Vishwakarma Yojna) की शुरुआत की गई है। यह योजना विशेष रूप से उन लोगों के लिए बनाई गई है जो लकड़ी, धातु, कपड़े, मिट्टी, चमड़े आदि के पारंपरिक कामों में निपुण हैं और स्वयं का छोटा व्यवसाय या सेवा कार्य करते हैं।
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना इन कारीगरों को वित्तीय सहायता, तकनीकी प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरणों के लिए टूलकिट, कम ब्याज पर ऋण और डिजिटल मार्केटिंग जैसे अनेक सुविधाएं प्रदान करती है। इसके माध्यम से सरकार इन कारीगरों को आधुनिक बाजार के साथ जोड़ने का प्रयास कर रही है, ताकि वे भी आत्मनिर्भर बन सकें और अपनी कला को एक नई पहचान दे सकें। यह योजना आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो न केवल आर्थिक विकास को बढ़ावा देती है, बल्कि पारंपरिक शिल्प को भी जीवित रखती है।
विश्वकर्मा योजना क्या है?
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना (PM Vishwakarma Yojna) भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को तकनीकी सहायता, वित्तीय मदद और ट्रेनिंग प्रदान करना है। इसके अंतर्गत बढ़ई, लोहार, कुम्हार, दर्जी, नाई, माली जैसे लगभग 18 पारंपरिक व्यवसायों को शामिल किया गया है।
इस योजना का मकसद न केवल आर्थिक सहायता देना है, बल्कि हुनरमंद लोगों को आधुनिक उपकरणों और तकनीक से जोड़कर उन्हें प्रतिस्पर्धी बाजार में खड़ा करना है।
Vishkarma Yojna – विश्वकर्मा योजना के मुख्य उद्देश्य

- आर्थिक सहायता: शिल्पकारों को कम ब्याज दर पर 3 लाख रुपये तक का लोन।
- कौशल विकास: आधुनिक तकनीकों में ट्रेनिंग और औजार खरीदने के लिए सहायता।
- रोजगार के अवसर: उत्पादकता बढ़ाने के लिए मार्केट एक्सेस।
- महिला सशक्तिकरण: महिलाओं को भी इस योजना का लाभ देकर आत्मनिर्भर बनाना।
योजना की विशेषताएं – Vishwakarma Yojana
विशेषता | विवरण |
लोन सुविधा | 5% ब्याज दर पर ₹1 लाख की पहली किस्त और ₹2 लाख की दूसरी किस्त। |
ट्रेनिंग प्रोग्राम | 5 से 15 दिनों की ट्रेनिंग और प्रतिदिन ₹500 का स्टाइपेंड। |
औजार सब्सिडी | औजार खरीदने के लिए ₹15,000 की सहायता। |
डिजिटल सपोर्ट | शिल्पकारों को डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन मार्केटिंग की जानकारी। |
सर्टिफिकेट और आईडी कार्ड | लाभार्थियों को पहचान पत्र और प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा। |
पात्रता मानदंड – Vishwakarma Yojana
इस योजना का लाभ लेने के लिए निम्नलिखित पात्रता शर्तें पूरी करनी होंगी:
पात्रता शर्तें | विवरण |
निवास प्रमाण | लाभार्थी भारत का निवासी होना चाहिए। |
आयु सीमा | 18 से 50 वर्ष। |
व्यवसाय | पारंपरिक कारीगर जैसे बढ़ई, लोहार, राजमिस्त्री, सुनार आदि। |
दस्तावेज़ | आधार कार्ड, बैंक पासबुक, और मोबाइल नंबर। |
विश्वकर्मा योजना – Vishkarma Yojna के तहत आवेदन कैसे करें?
चरण | विवरण |
स्टेप 1: आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं | Official Website पर जाकर रजिस्ट्रेशन करें। |
स्टेप 2: प्रोफाइल बनाएं | अपना मोबाइल नंबर और आधार कार्ड डिटेल दर्ज करें। |
स्टेप 3: दस्तावेज़ अपलोड करें | आवश्यक दस्तावेज़ जैसे आधार कार्ड और बैंक पासबुक अपलोड करें। |
स्टेप 4: आवेदन सबमिट करें | फॉर्म को सबमिट करने के बाद आवेदन स्थिति को ट्रैक करें। |
लाभार्थियों को मिलने वाले प्रमुख लाभ – Vishwakarma Yojana
लाभ | विवरण |
ट्रेनिंग के दौरान स्टाइपेंड | प्रशिक्षण के हर दिन ₹500 दिए जाएंगे। |
औजार खरीदने के लिए सब्सिडी | ₹15,000 तक की सहायता राशि। |
कम ब्याज दर पर लोन | 5% ब्याज दर पर ₹3 लाख तक का लोन। |
मार्केटिंग सपोर्ट | ऑनलाइन और ऑफलाइन प्लेटफार्म पर उत्पाद बेचने के लिए मदद। |
विश्वकर्मा योजना का प्रभाव
- आर्थिक सशक्तिकरण: कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने में सहायता।
- स्वरोजगार के अवसर: पारंपरिक शिल्प और हस्तशिल्प उद्योगों को बढ़ावा।
- महिला भागीदारी: महिलाओं को भी आर्थिक गतिविधियों में शामिल करना।
- ग्रामीण विकास: ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन।
चुनौतियां और समाधान – Vishwakarma Yojana
चुनौतियां | समाधान |
जागरूकता की कमी | व्यापक प्रचार-प्रसार और जागरूकता अभियान। |
डिजिटल लर्निंग में रुकावट | डिजिटल प्रशिक्षण सत्रों की संख्या बढ़ाना। |
लोन पुनर्भुगतान की समस्याएं | आसान किस्त भुगतान की सुविधा। |
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं है, बल्कि यह “आत्मनिर्भर भारत” की दिशा में एक मजबूत कदम है। यह योजना पारंपरिक कारीगरों को न केवल सम्मान देती है, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाकर आधुनिक भारत में अपना स्थान बनाने का अवसर भी देती है। यदि आप या आपके परिवार में कोई व्यक्ति पारंपरिक कार्य में संलग्न है, तो यह योजना उनके जीवन को एक नई दिशा दे सकती है।
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